99 Percent Modi Winning Chance : नरेंद्र मोदी की जीत के अवसर

यह मजेदार आर्टिकल हर चुनाव में Modi के Winning Chance को 99 प्रतिशत बताता है जिसके कुछ कारण है।

Modi Winning Chance 99 प्रतिशत ?

आ गया Election जी, छा गया Election जी। सोच क्या रहे हो भारतवासियों ये इलेक्शन है अब रैलियों का मेला लगेगा।एक तरफ Narendra Modi की सशस्त्र बीजेपी ब्रिगेड है तो दूसरी तरफ कांग्रेस के शहजादे राहुल के साथ भांति-भांति के गुणों वाली महा – बटालियन। जिसे नरेंद्र मोदी पहले से ही महा-मिलावट की उपाधि दे चुके हैं।

इन रैलियों में भाषणों के माध्यम से नेता आपको आपका भविष्य दिखाएंगे। गालियों से पाकिस्तान को धूल चटाएंगे। व्यंग बाणों से विपक्षियों को उनका घड़ियाली चेहरा दिखाएंगे और इन सबमें जो सबसे ज्यादा भाने वाला चेहरा होगा। वह होगा प्रधानमंत्री नरेंद्र दामोदर दास मोदी का।

तो अब सवाल यह है कि क्या Narendra Modi जी केवल अपने जोरदार भाषणों और व्यंग बाणों के दम पर ही चुनाव जीतने के 99 Percent Winning Chance रखते हैं। तो जवाब है नहीं, भाषणों के अलावा कहीं ऐसे Factors है जो नरेंद्र मोदी को Election में जीत दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

पुलवामा हमले के बाद Modi का Winning Action

पुलवामा हमले के बाद नरेंद्र मोदी जी जिस तरह से पाकिस्तान के खिलाफ ताबड़-तोड़ एक्शन ले रहे हैं। भूतकाल में पहले कभी किसी प्रधानमंत्री ने नहीं लिए। पाकिस्तान को नानी याद दिलाने के लिए अब बीजेपी व मोदी बार-बार राहुल गाँधी को उनकी नानी याद नहीं दिला रहे हैं। फ़िलहाल सारा फॉक्स पाकिस्तान की नानी पर ही किया जा रहा है जो कि चुनावी जंग में भी बीजेपी के लिए एक सकारात्मक कदम का काम कर रहा है।

45.8 मिलियन Vs 8.64 मिलियन फॉलोवर्स

21 वीं सदी में सोशल मीडिया की पावर से सभी परिचित हैं। 2019 के Election में अब सोशल मीडिया केवल किसी पार्टी या व्यक्ति विशेष का प्रचार ही नहीं करेगा अपितु एक दूसरे का कुर्ता भी फाड़ेगा और ना जाने कितनो की टोपी गिरेगी तो किसी के सफ़ेद कुर्ते पर कालिख पोत दी जाएगी। और ये सब करने वाले पार्टी के नुमाइंदे नहीं बल्कि लाखों- करोड़ों सोशल मीडिया Users होंगे। जिसमे कहीं वीमेन और मेन होंगे लेकिन किसी ना किसी के फैन होंगे।

अब ये अपने पसंदीदा उम्मीदवार के लिए फेन चलाते हुए दूसरे उम्मीदवार को मक्खी-मच्छर समझकर जीत से दूर भगाते हैं या शोर मचाकर, देखना होगा। सोशल मीडिया का शोर माइक के शोर से भी भारी होगा जो सीधा-सीधा वोट बैंक तैयार करेगा।

यहाँ @RahulGandhi अपने 8.64 Million Followers के साथ @narendramodi 45.8 Milliion Followers का सामना करेंगे। अब वोटर्स पर चुनावी रैलियों या पोस्टर्स से विशेष प्रभावित नहीं होता है। किन्तु जब उसका साथी या परिचित कोई राजनीतिक पक्ष या किसी नेता के प्रति झुकाव वाली पोस्ट करता है तो उसका असर उसके मानसिक पटल पर ऐसा पड़ता है। कि बंदा मोबाइल पर खाने के साथ पाकाने (टॉयलेट) में भी पोस्ट और कमेंट करना नहीं छोड़ता। वाइफ बाहर से चिल्लाती है अजी करने बैठे हो या चुनाव लड़ने बैठे हो।

हिला देने वाले कड़े कदम

चाहे नोटबंदी हो या GST , हंगामा भले ही खूब हुआ लेकिन देश की जगह मीडिया और विपक्ष में ही इनको लेकर वाइब्रेशन ज्यादा नजर आया। जनता नोटबंदी और GST को लेकर लगभग साइलेंट मोड पर ही रही। बल्कि इन नोटबंदी और GST जैसे फैसलों से जनता में यह सन्देश गया कि देश में कड़े फैसले लेने वाला एक कड़क प्रधानमंत्री है। जो सभी को कड़क चाय पीला रहा है और भारतियों को कड़क चाय बड़ी पसंद आती है।

Modi हिन्दू Face वन्स More

नरेंद्र मोदी के शासनकाल के दौरान हिन्दूवादी भावना को इतना बल मिला है कि फल प्राप्ति की इच्छा जनता में जाग उठी। और फल के रूप में वापिस चाहिए नरेंद्र मोदी। भारत देश में हिन्दू आबादी का बाहुल्यअच्छा-खासा है। अतीत में कही ऐसे कारण रहे जिससे हिन्दू विचारधारा को आघात पहुंचा और पिछले पांच सालों में मोदी सरकार अप्रत्यक्ष रूप से उन पर ध्यान दिया है चाहे वह कुछ स्थानों का नाम परिवर्तन हो या अन्य सामाजिक मुद्दे।

इनके अतिरिक्त भी कहीं ऐसे Factor है जो Narendra Modi के फिर से आने के 99 Percent Winning Chance बनाते हैं। मोदी वर्तमान में एक मजबूत नेता के रूप में देश के सामने आये हैं और हर भारतीय चाहता है कि देश का प्रधानमंत्री दृढ़निश्चय और कड़े फैसले लेने वाला हो। आगामी 2019 के Election में नरेंद्र मोदी सामने कोई और दूसरा इतना प्रभावी नेता हैं।

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